बेटी को पढ़ाने की ये तमन्ना ही थी कि एक मजदूर बोलने - सुनने में अक्षम अपनी बिटिया को गांव के परिषदीय स्कूल में दाखिला कराने पहुंच गया ।शिक्षक के लिए ये फर्ज की परीक्षा थी कि वह दाखिला देने के साथ ही बेटी को उसी की भाषा में शिक्षा भी दे पढ़ने को लेकर बालिका में ललक दिखी तो उत्साहित शिक्षिका ने भी होमवर्क किया ।यूटयूब से साइन लैंग्वेज सीखी , कक्षा में अभ्यास किया ।अंततः सफलता पाई ।और सिखाना शुरू किया ।वह बच्ची अब कक्षा चार की छात्रा है ।
सिस्टम को आईना दिखाती ये सराहनीय पहल । मैनपुरी , उप्र की प्राथमिक पाठशाला बदनपुर की है । वर्ष 2016 में गांव का मजदूर दलवीर सिंह बेटी तान्या का दाखिला कराने आया । बोलने - सुनने में दिव्यांग तान्या को लेकर हेडमास्टर प्रज्ञा श्रीवास्तव एकबारगी हिचकी मगर इसे पढ़ाने को एक चुनौती के रूप में लेते हुए कक्षा । एक दाखिला दे दिया । प्रज्ञा बताती हैं कि कई दिनों ! तक यही सोचती रहीं कि इस बच्ची को कैसे पढ़ाएं । एक दिन युट्युब का सहारा लिया । साइन लैंग्वेज के अमेरिकन और ब्रिटिश फॉर्मेट के ट्यूटोरियल खंगालने के बाद ब्रिटिश फॉरमेट में टू हैंडेड लैग्वेज का अभ्यास शुरू कर दिया । सांकेतिक भाषा का एक चार्ट लाकर कक्षा लगा दिया । तान्या से संकेतों की भाषा में संवाद होने लगा । बताती हैं कि दो महीने तक पढ़ाने में बहुत मुश्किल आई , परंतु धीरे - धीरे तान्या भी इस भाषा को समझने लगी । इस सत्र में तान्या कक्षा चार में पढ़ रही है । प्रज्ञा बताती हैं कि तान्या सामान्य बच्चों की तरह एबीसीडी , गिनती , हिंदी के लेखन - अध्ययन के साथ गणित के सवाल भी हल कर लेती है । बतौर शिक्षिका प्रज्ञा श्रीवास्तव को नवाचार के लिए विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है ।

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