सड़क एवं परिवहन मंत्रालय पांच शहरों के प्रोजेक्ट पर प्राथमिकता से कर रहा काम

प्रदूषण संकट और महंगे होते पेट्रोल - डीजल के बीच सरकार हाइड्रोजन व बायोफ्यूल से संचालित वसों को सड़कों पर उतारने की तैयारी में है ।केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरूआत में देश के पांच शहरों इन बसों को संचालित करने जा रहा है , जिनमें गाजियावाद भी शामिल है ।प्रोजेक्ट की शुरूआत में 10 से 15 बसें प्रत्येक शहर को दी जाएंगी अगले छह से आठ महीने में प्रोजेक्ट धरातल दिखाई देगा ।सरकार इस प्रोजेक्ट को इलेक्ट्रिक बसों से सस्ता मान कर चल रही है , जिससे जनता को सस्ती दरों पर परिवहन सुविधा मिल सकेगी ।

पहले चरण में गाजियाबाद के साथ नागपुर , दिल्ली , चंडीगढ़ व मैसूर में बसों को संचालित करने की योजना है ।गाजियाबाद में मुरादनगर - मोदीनगर , लोनी - गाजियाबाद व पिलखुवा गाजियाबाद रूट पर चलाने की तैयारी है ।प्रोजेक्ट सफल होने के बाद अगले चरण में बसो की संख्या बढ़ाई जाएगी ।इन बसों को संचालित करने के लिए ' बायोफ्यूल पंप और हाईड्रोजन की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर की जाएगी ।शुरूआती तौर पर नगर निगम और जीडीए को बसों के लिए जमीन मुहैया करानी होगी ।उसके बाद प्रोजेक्ट सफल होने पर इन बसों के लिए स्थाई रूट तैयार कर दिए जाएंगे मंत्रालय की तरफ से इस संबंध में प्रदेश सरकार के शहरी आवास व परिवहन विभाग के साथ पहले दौर की वार्ता चुकी है ।जल्द ही प्रोजेक्ट को लेकर अंतिम रूप से नगर निगम , जीडीए स्थानीय प्रशासन के साथ भी वार्ता होनी है ।

 माना जा रहा है कि इलेक्ट्रिक बसों के साथ ही बायो व हाईड्रोजन से संचालित बसों को सड़कों पर उतारा जाएगा ।इस पूरे प्रोजेक्ट को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय चला रहा है जबकि इलेक्ट्रिक बसें राज्य सरकार की तरफ से सड़कों पर उतारी जानी हैं ।

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